जिले के टोंकखुर्द विकासखंड के इकलेरा की श्रीमती उर्मिला पाटीदार आज ग्रामीण महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गई हैं। मेहनत, लगन और सही मार्गदर्शन के साथ उन्होंने अपनी आजीविका को मजबूत करने के लिए एक नहीं, बल्कि तीन अलग-अलग गतिविधियों को अपनाया। कार्तिक स्व सहायता समूह और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़कर उर्मिला दीदी ने साड़ी दुकान, पशुपालन तथा आलू उत्पादन को अपनी आय का माध्यम बनाया और आज लगभग 2 लाख रुपए वार्षिक शुद्ध आय अर्जित कर रही हैं। अपने जीवन में आए इस सकारात्मक बदलाव के लिए वे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति हृदय से आभार व्यक्त कर रही हैं।

समूह से जुड़ीं, आत्मनिर्भरता की राह चुनी

श्रीमती उर्मिला पाटीदार के लिए बदलाव की शुरुआत कार्तिक स्वसहायता समूह से जुड़ने के साथ हुई। समूह के माध्यम से उन्हें नियमित बचत, वित्तीय प्रबंधन, बैंक लिंकेज और स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी मिली। उन्होंने समूह से प्राप्त ऋण का उपयोग योजनाबद्ध तरीके से अलग-अलग आजीविका गतिविधियां शुरू करने में किया। आत्मनिर्भर बनने के संकल्प के साथ श्रीमती उर्मिला पादीदार ने समूह के माध्यम से 50 हजार रुपए का पहला ऋण लिया। इस राशि से उन्होंने इकलेरा गांव में साड़ी की दुकान शुरू की। ग्राहकों की पसंद को समझते हुए अच्छी वैरायटी उपलब्ध कराने और बेहतर व्यवहार के कारण उनकी दुकान चल निकली। इससे उन्हें लगभग 6 हजार रुपए प्रतिमाह शुद्ध आय होने लगी। इसके पश्चात उन्होंने अपनी आय के नए स्रोत तलाशे।

उन्होंने समूह से 1 लाख रुपए का दूसरा ऋण लिया और पशुपालन शुरू किया। उन्नत नस्ल के मवेशियों के माध्यम से दूध उत्पादन एवं बिक्री का व्यवसाय शुरू किया। इससे उन्हें लगभग 8 हजार रुपए प्रतिमाह अतिरिक्त शुद्ध आय प्राप्त होने लगी। इसके पश्चात उन्होंने कृषि क्षेत्र में भी कदम बढ़ाया। उन्होंने प्रोड्यूसर ग्रुप से जुड़कर 1 लाख रुपए का तीसरा ऋण लिया और उन्नत तरीके से आलू उत्पादन शुरू किया। उत्पादक समूह के माध्यम से उन्हें खेती की तकनीकी जानकारी के साथ अपनी उपज के लिए बेहतर बाजार तक पहुंच मिली। आलू की सीजनल फसल से उन्हें लगभग 32 हजार वार्षिक मुनाफा प्राप्त हुआ। आज इन तीनों के माध्यम से करीब 02 लाख रुपए की सालाना आय अर्जित कर रही है।

श्रीमती उर्मिला पाटीदार ने तीन अलग-अलग आजीविका गतिविधियों के माध्यम से अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं। समय पर ऋण की किश्तों का भुगतान करते हुए वे अपने बच्चों की शिक्षा और परिवार की जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा कर पा रही हैं। उनकी सफलता गांव की अन्य महिलाओं को भी स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही है।