डेंगू एवं चिकनगुनिया जैसी मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम एवं नियंत्रण के उद्देश्य से राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत स्वास्थ्य कर्मचारियों का जिला स्तरीय रिओरिएंटेशन प्रशिक्षण कार्यक्रम गत दिवस जिला चिकित्सालय सभागार में आयोजित किया गया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को एंजेडा अनुसार डेंगू एवं चिकनगुनिया के लक्षण, कारण, बचाव के उपाय तथा जांच एवं उपचार से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गई।
इसके साथ ही बीमारी फैलाने वाले मच्छरों एवं उनके लार्वा की पहचान, लार्वा नियंत्रण के प्रभावी उपाय, सामुदायिक भागीदारी तथा व्यवहार परिवर्तन के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार की आवश्यकता के संबंध में भी विस्तार से जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में डेंगू एवं चिकनगुनिया के हॉट स्पॉट की पहचान तथा इनके नियंत्रण के लिए अपनाए जाने वाले प्रतिबंधात्मक एवं आवश्यक उपायों पर भी चर्चा की गई।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सुधाकर पाण्डेय, जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. के.बी. गौतम, श्रीमती सदब खान, वीबीडीसी जिला सलाहकार तथा दिवाकर मिश्रा, सहायक मलेरिया अधिकारी द्वारा प्रतिभागियों को विभिन्न विषयों की जानकारी प्रदान की गई। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को हैंड्सऑन ट्रेनिंग भी दी गई तथा लार्वा कंटेनर सर्वे एवं लार्वा विनिष्टीकरण के लिए आवश्यक प्रतिबंधात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
अधिकारियों ने स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं से कहा कि प्रशिक्षण में प्राप्त जानकारी का उपयोग अपने-अपने क्षेत्रों में प्रभावी रूप से करें तथा मच्छरों के प्रजनन स्थलों की पहचान कर समय पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें। उन्होंने सभी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं से डेंगू एवं चिकनगुनिया की रोकथाम के लिए आमजन को जागरूक करने और समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का भी आह्वान किया। डेंगू फैलाने वाले मच्छर साफ पानी में अंडे देते हैं।
इसलिए घर एवं आसपास साफ-सफाई रखना और किसी भी पात्र या कंटेनर में तीन से पांच दिन से अधिक समय तक पानी जमा नहीं होने देना आवश्यक है। कूलर, फ्रिज की ट्रे एवं बर्तनों की सप्ताह में कम से कम एक बार सफाई करने, घर के आसपास ऐसे अनुपयोगी सामान में पानी एकत्रित नहीं होने देने तथा पानी से भरे कंटेनरों को ढककर रखने की सलाह दी गई।
जिन कंटेनरों का पानी सप्ताह में खाली नहीं किया जा सकता, उनमें निर्धारित मात्रा में टेमेफॉस, केरोसिन या जला हुआ इंजन ऑयल डालने की जानकारी भी दी गई। इसके साथ ही सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करने, पूरी आस्तीन के कपड़े पहनने तथा मच्छरों के काटने से बचने के लिए आवश्यक सावधानी बरतने की अपील की गई।


