मध्यप्रदेश प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग के अध्यक्ष श्री एसएन मिश्रा ने कहा कि प्रशासनिक पुनर्गठन का प्रमुख उद्देश्य नागरिकों को शासकीय सेवाएं सहज एवं सुगम रूप से उपलब्ध कराना तथा सुलभ, उत्तरदायी एवं जनोन्मुखी प्रशासन सुनिश्चित करना है। प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन एवं युक्तियुक्तकरण से प्रशासनिक कार्यों में दक्षता आएगी और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। आयोग वर्ष 2047 की आवश्यकताओं को दृष्टिगत रखते हुए प्रशासनिक इकाइयों के युक्तियुक्तकरण के संबंध में अनुशंसाएं तैयार कर रहा है।

अध्यक्ष श्री मिश्रा मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार, मुरैना में प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन के संबंध में आयोजित जिला स्तरीय बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में आयोग के सचिव श्री अक्षय कुमार सिंह, कलेक्टर श्री लोकेश कुमार जांगिड़, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री कमलेश कुमार भार्गव, अपर कलेक्टर श्री अश्विनी कुमार रावत, समस्त अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, आयुक्त नगर निगम सहित विभिन्न विभागों के जिला अधिकारी उपस्थित रहे।

श्री मिश्रा ने बताया कि आयोग के चार प्रमुख कार्यक्षेत्र निर्धारित किए गए हैं। आयोग भौगोलिक परिस्थितियों एवं जन-अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन के संबंध में अनुशंसाएं करेगा। इसके साथ ही नवीन प्रशासनिक इकाइयों के गठन के लिए मार्गदर्शी सिद्धांत निर्धारित करने, पदीय संरचना एवं उसके युक्तियुक्तकरण तथा प्रशासनिक इकाइयों की कार्यक्षमता बढ़ाने के संबंध में भी अनुशंसाएं की जाएंगी। उन्होंने बताया कि आयोग द्वारा भारतीय प्रबंध संस्थान एवं भारतीय लोक प्रशासन संस्थान के सहयोग से अन्य राज्यों की प्रशासनिक व्यवस्थाओं का अध्ययन भी किया जा रहा है।

अध्यक्ष श्री मिश्रा ने कहा कि आयोग की कार्यपद्धति प्रश्नावली आधारित है। इसके माध्यम से प्रशासनिक इकाइयों एवं प्रशासनिक अमले से संबंधित सुझाव आमंत्रित किए जा रहे हैं। उन्होंने प्रश्नावली के विभिन्न भागों एवं प्रपत्रों की जानकारी देते हुए अधिकारियों से अपेक्षित सुझावों के संबंध में विस्तार से अवगत कराया। जिला, तहसील एवं जनपद स्तर के अधिकारियों द्वारा प्रश्नावली पूर्ण कर जिला कलेक्टर को उपलब्ध कराई जाएगी। इसके बाद समस्त जानकारी का संकलन कर आयोग को प्रेषित किया जाएगा। प्रस्ताव तैयार करते समय जनप्रतिनिधियों से भी आवश्यकतानुसार सुझाव लिए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि सामूहिक बुद्धिमत्ता एवं अनुभव के आधार पर तैयार किए गए प्रस्तावों के बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं। आयोग का प्रयास है कि भविष्य में नागरिकों एवं शासकीय सेवकों को वर्तमान में सामने आने वाली प्रशासनिक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।

आयोग के सचिव श्री अक्षय कुमार सिंह ने बताया कि मंगलवार को पूर्ण आयोग की बैठक आयोजित की गई है। इसके एक माह पश्चात फॉलोअप बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें केवल सचिव उपस्थित होंगे। उन्होंने बताया कि शासकीय सेवकों से सुझाव प्राप्त करने के लिए व्हाट्सएप समूह बनाया जाएगा, जो आगामी चार माह तक सक्रिय रहेगा। आयोग की वेबसाइट www.mpaurc.mp.gov.in पर भी सुझाव प्रस्तुत किए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि आयोग द्वारा अब तक 49 जिलों का भ्रमण किया जा चुका है।

कलेक्टर श्री लोकेश कुमार जांगिड़ ने कहा कि नागरिकों की अपेक्षाओं के अनुरूप शासकीय सेवाओं का प्रभावी प्रदाय नहीं होने पर असंतोष की स्थिति निर्मित होती है। वर्तमान समय में नागरिकों की अपेक्षाएं निरंतर बढ़ रही हैं, ऐसे में प्रशासनिक युक्तियुक्तकरण के साथ जवाबदेही सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विभागीय अधिकारियों के व्यावहारिक अनुभवों के आधार पर सभी विभागों से उपयोगी एवं व्यवहारिक सुझाव अपेक्षित हैं। आयोग द्वारा वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर प्रश्नावली तैयार की गई है, जिसमें जनसुविधाओं के साथ-साथ भविष्य की आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखा गया है। उन्होंने सभी विभागीय अधिकारियों को प्रश्नावली निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण कर जिला स्तर पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

बैठक के प्रारंभ में कलेक्टर श्री लोकेश कुमार जांगिड़ ने आयोग के अध्यक्ष श्री एसएन मिश्रा एवं सचिव श्री अक्षय कुमार सिंह का पुष्पगुच्छ एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर स्वागत किया।